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Taiyar maal factory me kahn rakhen

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Taiyar maal factory me kahn rakhen

फैक्ट्री निर्माण में वास्तु सिद्धांतों व उनके सूत्रों का पालन करना चाहिए जिससे उस स्थान पे पंच तत्वों का ठीक से समन्वय हो और उस फैक्ट्री में जिस भी किसी चीज का निर्माण हो रहा है वह सही तथा फिट हो और जब वह वहां से निर्मित होकर बाजार में पहुंचे तो अपनी गुणवत्ता से उपभोक्ताओं का दिल जीत सके जिससे मालिक को उसका अच्छा मूल्य प्राप्त हो और वह लाभवन्तित हो सके।


पाठकों मै वास्तु आचार्य उदय प्रकाश अपने अनेकों फैक्ट्री के वास्तु विजिट में पाया है की उस फैक्ट्री में अच्छी गुणवत्ता वाले तैयार सामान के आर्डर बिलकुल न के बराबर होते हैं, जिसका मुख्य कारण होता है वहां तैयार माल का गलत जोंन में रखा होना। हम सभी जानते हैं कि ज्यादातर फैक्ट्री ही सभी व्यवसाय का आधार होती है, जिनसे मालिक के साथ-साथ मैनेजमेंट टीम, तकनीशियन, लेबर, ट्रांसपोर्ट आदि सीधे जुड़े होते हैं और कंपनी में निर्माण होने वाली वस्तु और उसके लाभ से प्रभावित होते हैं। अब अगर फैक्ट्री में तैयार माल मार्किट में जायेगा ही नहीं अर्थात उस माल का आर्डर ही नहीं आयेगा तो फैक्ट्री मालिक के साथ-साथ फैक्ट्री से जुडा हर व्यक्ति इससे प्रभावित होगा, तो आइये जानते हैं कि इसके लिए फैक्ट्री का कौन सा जोंन वास्तु अनुसार अच्छा माना गया है।


चाहे किसी भी चीज का फैक्ट्री में निर्माण होता हो वहां तैयार सामान (finished goods) को हमेसा वायव्य कोण (north west) में रखना चाहिए। यह दिशा वायु प्रधान होने से वहां रखे तैयार सामान को जल्दी से जल्दी बिकने में सहायता करेगी अर्थात उस सामान का आर्डर डिस्ट्रीब्यूटर की तरफ से जल्दी आयेगा। वायव्य कोण चन्द्रमा की दिशा है और चंद्रमा का स्वभाव चंचलता भरा होता है उसकी इसी चंचलता के फल स्वरूप तैयार माल वहां टिककर रहता नहीं बल्कि वायु के वेग से अपने सही स्थान (मार्किट और ग्राहक) तक पहुंच जाता है, और नए आर्डर का श्रोत निरंतर खुला रहता है। अगर गलती से भी तैयार माल नैरित्य कोण अर्थात पृथ्वी दिशा में रखा गया है तो वह स्टेबल जोंन में आ जायेगा जिससे उसका आर्डर बिलकुल न के बराबर ही रहेगा, तथा मिला हुआ आर्डर भी बार-बार कैंसिल होने की सम्भावना बनेगी अतः फैक्ट्री मालिक को फैक्ट्री का निर्माण करते समय अवश्य ध्यान रखना चाहिए।


अगर पहले से ही फैक्ट्री स्थापित है जिसमे इस तरह की अथवा अन्य अनचाही अड़चने आ रही हैं तो मित्रों मैं आप का अपना /वास्तु सलाहकार/ पं. उदयप्रकाश शर्मा आप से इतना ही कहना चाहूंगा कि अपने किस्मत को कोसने के बजाय हमे यह समझना चाहिए कि इस युग में मृत्यु को छोड़कर हर समस्या का समाधान होता है, बात है जागरूकता की। मैंने अपने वर्षों के अनुभव में छोटे बड़े कई उद्योगों का सफलता पूर्वक उपचार किया है जिससे बड़े अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं।


आज विज्ञान का युग हैं। आज आधुनिक रूप से आधुनिक यंत्रो द्वारा सटीक रूप से Positive - Negative ऊर्जाओं का सोधन कर पाना संभव हुआ है अगर संबंधित स्थान पे नकारात्मक ऊर्जा है अथवा ऊर्जा का अभाव है अर्थात वहां शून्य ऊर्जा है तो वहां प्राण ऊर्जा का सामंजस्य स्थापित करने हेतु धरती के चुम्बकीय क्षेत्र उत्तरी ध्रुव- दक्षिणी ध्रुव अंतरिक्ष की शुभ ऊर्जाओं को आकर्षित करना पड़ता है जिसके लिए आवस्यकता अनुसार वैज्ञानिक यंत्र, पिरामिड, ऊर्जा प्लेट, क्रिस्टल एवं रत्न-उपरत्नों के कोणीय प्रभाव, तथा धातुवों से बनी विभिन्न कोणीय आकृतियों का प्रयोग करना होता है। कोई नकारात्मक दोष वहां पर है तो पूजा-हवन भी करवाना पड़ता है I अतः आप के औद्योगिक परिसर में फैक्ट्री-कारखाने में कोई वास्तु दोष हो तो निःसंकोच आप को किसी कुशल वास्तुशास्त्री से संपर्क कर उनसे परामर्श लेना चाहिए और संबंधित स्थान का पूरे वैज्ञानिक विधि से जांच करवानी चाहिए मित्रों अगर वहां ऐसा कुछ भी हो जिससे अनचाही पीड़ा और उद्योग में असफलता मिल रही हो तो अपने इष्टदेव को प्रणाम कर उनसे आज्ञा ले उस समस्या का उचित उपाय करवाना चाहिए। और अपने औद्योगिक विकाश को गति देनी चाहिए।


।। इति शुभम् ।।

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