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Disha shool

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आईये जानते हैं यात्रा में दिशा शूल का विचार कितना महत्वपूर्ण होता है?

हम सभी लोग आये दिन कहीं न कहीं की यात्रा करते हैं। कभी काम- धंधे व व्यापार से संबंधित यात्रा तो कभी अपनी एजुकेशन से संबंधित यात्रा तो कभी किसी विवाह, रिश्ते जैसे मांगलिक कार्य हेतु यात्रा, कभी तीर्थ अथवा धार्मिक प्रयोजन से यात्रा। इस तरह के अनेकों ऐसे प्रयोजन होते है जिसके लिए हमें यात्रा करनी ही पड़ती है। हमारा यही मनोरथ होता है कि हम जिस भी कार्य हेतु यात्रा कर रहें हैं उसमे हमें सफलता जरुर प्राप्त हो।


दिशा के बारे में तो हम सभी जानते हैं और शूल का अर्थ होता है चुभन अर्थात पीड़ा देने वाला इससे स्पष्ट होता है की कोई विशेष दिन किसी विशेष दिशा में यात्रा प्रारंभ करने पर पीड़ा अथवा चुभन (विघ्न) देता है। हमारे आधुनिक वैज्ञानिकों द्वारा जब दिशाशुल को समझने की कोशिश की गयी तो उन्होंने पाया कि दिशाशुल पूर्ण रूप से दिशा और पंच तत्व की एनर्जी पर कार्य करता है। आज विज्ञान की अनेक ऐसी शाखायें है जहाँ इन प्राचीन काल से चली आ रही प्रथाओं का विश्लेषण किया जा रह है और आश्चर्यजनक बात तो ये है कि परा – मनोविज्ञान और मेटाफिजिक्स ने तो इन प्रथाओं को स्वीकार भी कर लिया है।


पर आजकल की ज्यादातर जवान पीढ़ी बुजुर्गो की इन बातों को अन्धविसवास मानती है। लेकिन सत्य यही है कि बड़े हमेशा बड़े ही रहते हैं। इसलिए हमे उनका आदर करना चाहिए. साथ ही उनकी बातों का भी आदर करना चाहिए। भले ही आज की परिस्थितियां पहले जैसी नहीं हैं पहले आज के जैसे तेज रफ़्तार वाहन नहीं होते थे 100 किलोमीटर की भी यात्रा लम्बी होती थी जहाँ पहुँचने में बहुत समय और उर्जा व्यय होती थी, उन्हें जाकर बिना कार्य हुए खाली वापस आने की पीड़ा न झेलनी पड़े इसके लिए वह यात्रा से पहले दिशा शूल का बहोत ध्यान रखते थे। भले ही आज हम अपने तेज रफ़्तार वाहन से अपने गन्यव्य पर जाकर लौट भी सकते हैं पर कार्य न हुआ अथवा उसमे कोई विघ्न आया तो अपना मूड ऑफ़ ही करेंगे, हाँ यह भी सत्य है की आज की भागम-भाग भरी तेज रफ़्तार जिंदगी में नित्य दिशा शूल का पालन कर पाना भी तो संभव नहीं है ऐसे में इसका जो भी सामान्य उपाय है उसको अपनाकर अपनी यात्रा सुखद तो की ही जा सकती है तो आइये पाठकों वास्तुविद एवं ज्योतिष आचार्य पं. उदय प्रकाश शर्मा द्वारा जानते हैं की दिशा शूल कैसे देखते हैं और अपनी यात्रा को कैसे शुभ एवं लाभप्रद बना सकते हैं।



रविवार को पश्चिम West दिशा तथा नैरित्य South West दिशा में दिशा शूल होता है


सोमवार को पूर्व East दिशा तथा आग्नेय South East दिशा में दिशा शूल होता है


मंगलवार को उत्तर North दिशा तथा वायव्य North West दिशा में दिशा शूल होता है


बुधवार को उत्तर North दिशा तथा ईशान North East दिशा में दिशा शूल होता है


गुरुवार को दक्षिण South दिशा तथा आग्नेय South East दिशा में दिशा शूल होता है


शुक्रवार को पश्चिम West दिशा तथा नैरित्य South West दिशा में दिशा शूल होता है


शनिवार को पूर्व East दिशा तथा ईशान्य North East दिशा में दिशा शूल होता है


( सभी दिशाओं के प्रभाव का सम्पूर्ण ज्ञान जानें )



दिशा शूल में महत्वपूर्ण नियम

यदि घर से अपनी यात्रा सुरु कर उसी दिन गंतव्य स्थान पर पहुंचं जाना हो तथा अपने नित्य के कार्य जैसे अपने ऑफिस, कारखाने, ड्यूटी, फिल्ड-मार्केटिंग आदि के लिए निकलना हो तो ऐसी यात्रा में दिशा शूल का कोई प्रभाव नहीं होता अतः इसका विचार नहीं करना चाहिए


अगर दिशा शूल में यात्रा करना अनिवार्य हो तो.. इसके लिए हमारे प्राचीन ऋषि-आचार्यों ने कुछ नियम प्रतिपादित किये हैं जिनका पालन करने से यात्रा सुखद होती है


रविवार को दिशा शूल की दिशा में यात्रा प्राम्भ करनी हो तो घर से दलिया अथवा घी खाकर निकले और हाँ यात्रा शुरू करने से पहले पांच कदम पीछे की ओर चलें जिससे दिशा शूल का दोष न्यून हो जाता है।


सोमवार को दिशा शूल की दिशा में यात्रा प्रारंभ करनी हो तो दर्पण मे अपना चेहरा देख कर घर से निकलें और हाँ अपनी यात्रा शुरू करने से पहले पांच कदम पीछे की ओर चलें जिससे दिशा शूल का दोष न्यून हो जाता है।


मंगलवार को दिशा शूल की दिशा में यात्रा प्रारंभ करनी हो तो गुड़ खाकर घर से निकले। और अपनी यात्रा सुरु करने से पहले पांच कदम पीछे की ओर चलें जिसके प्रभाव से दिशा शूल का प्रभाव न के बराबर रहता है।


बुधवार को दिशा शूल की दिशा में यात्रा प्रारंभ करनी हो तो धनिया या तिल खाकर घर से निकले। और हाँ यात्रा शुरू करने से पहले पांच कदम पीछे की ओर चलें जिसके प्रभाव से दिशा शूल का प्रभाव न्यून हो जाता है।


गुरुवार को दिशा शूल की दिशा में यात्रा प्रारंभ करनी हो तो दही या जीरा खाकर घर से निकलना चाहिए। तथा यात्रा शुरू करने से पहले पांच कदम पीछे की ओर चलना चाहिए ऐसा करने से दिशा शूल का प्रभाव कम हो जाता है।


शुक्रवार को दिशा शूल की दिशा में यात्रा प्रारंभ करनी हो तो घर से जौ या राइ खाकर निकलना शुभ होता है। और हाँ यात्रा शुरू करने से पहले पांच कदम पीछे की ओर चलना अच्छा होता है इससे दिशा शूल का प्रभाव कट जाता है।


शनिवार को अगर दिशा शूल की दिशा में यात्रा प्रारंभ करनी हो तो घर से अदरक, उड़द या तिल खाकर निकलना चाहिए यह शुभ होता है। यहाँ भी यात्रा शुरू करने से पहले पांच कदम पीछे की ओर चलना दिशा शूल के प्रभाव को कम करता है।



।। इति शुभम् ।।

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